अपने हक़ को लेकर मजदुर संगठनो ने किया प्रदर्शन

अपनी मांगों को लेकर बुधवार को बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन के तत्वावधान में प्रदर्शन का आयोजन किया गया। प्रदर्शन का नेतृत्व जिला सचिव शिव शंकर प्रसाद ने की। निर्माण मजदूरों द्वारा रेलवे परिसर से शहर के मुख्य मार्गों से होता हुआ श्रम अधीक्षक कार्यालय तक प्रदर्शन किया गसर। सभा को संबोधित करते हुए सचिव ने कहा कि देश में लगातार 20 वर्षों तक संघर्ष चला तब जाकर मजदूरो के लिए 1996 में बिहार भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम बना।मजदूरों के कल्याणार्थ बोर्ड का गठन हुआ जिससे लोग लाभान्वित हो रहे हैं। मोदी की सरकार ने 44 श्रम कानून खत्म कर चार कोड में बदल दिया है। न्यूनतम मजदूरी को कम करना, बोनस समाप्त,सामाजिक सुरक्षा योजना में कटौती तथा काम के घंटों में बढ़ाना उसी का नतीजा है। यह कानून सभी जिले में अभी तक लागू नहीं किया गया है। अपने हक और अधिकार के लिए लगातार संघर्ष करना होगा। गैर मजदूरों को दलालों द्वारा निबंधन कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2013 में 170 मजदूरों से 22 रूपए प्रति माह वसूल करने के बावजूद छह वर्ष बाद भी अनुदान की राशि भुगतान नहीं किया गया है। पहले मजदूरों को साइकिल, औजार एवं गृह मरम्मति को लेकर 15 हजार रूपए दिया जाता है लेकिन अब बीमारी के इलाज के नाम पर मात्र तीन हजार रूपए देकर मजदूरों को ठग रही है। इस मौके पर इंद्रेश पासवान, सत्येंद्र दास, सुरेंद्र बिद,हृदयलाल दास सहित कई मजदूर उपस्थित थे।

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