बाल विवाह पर रोक से लाखों बच्चों की बच सकती है जिंदगी : डा. विजय कुमार सिन्हा

सिविल सर्जन डा. विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बाल विवाह के कारण हर साल लाखों बच्चों की जिंदगी तबाह हो रही है। उन्होंने इस संबंध में सामाजिक जागरूकता का आह्वान करते हुए लोगों से इसे बच्चों के व्यापक स्वास्थ्य हित में रोकने के लिए सामाजिक पहल की अपील की है। उन्होंने बताया कि द ग्लोबल पार्टनरशिप टू इंड चाइल्ड मैरिज की ही रिपोर्ट के अनुसार बाल विवाह पर अंकुश लगाने से आगामी 15 सालों में लगभग 21 लाख शिशुओं को मरने से बचाया जा सकता है। साथ ही इससे 36 लाख बच्चों को नाटापन के शिकार होने से भी बचाया जा सकता है। 20 वर्ष से कम उम्र में लड़कियों की शादी होने से मृत नवजात जन्म की संभावना 50 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। इसलिए 15 से 18 वर्ष तक आयु वर्ग की किशोरियों में गर्भधारण एवं प्रसव संबंधित जटिलताओं के कारण सर्वाधिक मौतें भी होती हैं।

2050 तक पहुंच सकती है 120 करोड़

इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2050 तक बालविवाह की संख्या 120 करोड़ के पार पहुंच सकती है। फ़िलहाल प्रतिवर्ष 18 साल से कम उम्र में लगभग 15 लाख लड़कियों की शादी हो जाती है। यही कारण है कि जिन देशों में बाल विवाह की दर अधिक है, उन देशों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को लेकर अधिक चुनौतियां भी है। इसलिए बालविवाह पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए हर स्तर से पहल की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बालविवाह को रोकने के लिए सरकारी प्रयासों को और अधिक मजबूत करने के लिए सामाजिक स्तर पर भी जागरूकता लाने की बहुत जरूरत है। कम उम्र में शादी होने से प्रसव के बाद भी कई जटिलताएं आती हैं. जिसमें ऑब्सट्रेटिक फिस्टुला( जन्म नलिका में छिद्र होना) एक गंभीर समस्या है।ओबेसट्रेटीक फिस्टुला के कुल मामलों में लगभग 65 प्रतिशत मामले 18 वर्ष से कम उम्र में मां बनने वाली किशोरियों में होती है। कम उम्र में शादी होने वाली लड़कियों का शरीर गर्भधारण करने के लिए परिपक्व नहीं होता है।

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