Bihar: अनलॉक-1 में कोरोना के फैलाव की आशंका, सामुदायिक संक्रमण रोकने की चुनौती

अनलॉक 1 (Unlock 1) की घोषणा के बाद रियायत के साथ ही बिहार में स्वास्थ्य विभाग के समक्ष कई चुनौतियां आ खड़ी हुई हैं। सबसे बड़ी चुनौती कोरोना के सामुदायिक संक्रमण (Community Transmission) से निपटने की है। मॉल, होटल, रेस्टोरेंट, पूजा स्थल खोलने एवं अंतरराज्यीय बसों के शुरू होने से फिजिकल डिस्टेंसिंग (Physical Distancing) का पालन बमुश्किल हो पाएगा। ऐसे में कोरोना के मामले (Corona Positive Cases) बढ़ेंगे। समुदाय में भी इसके फैलने से इन्‍कार नहीं किया जा सकता है। मौत (Death) के मामले भी बढ़ने की आशंका है। एहतियातन राज्य के तीन जिलों में सामुदायिक संक्रमण की दृष्टि से सर्वे कराया जा रहा है।

आने वाली चुनौतियां

बिहार में अभी कुल 20 संस्थानों में प्रतिदिन करीब तीन हजार कोरोना सैंपल की जांच (Corona Test) हो रही है। अब जांच के दायरे को बढ़ाने के लिए सभी अस्पतालों में आवश्यक संसाधनों के साथ जांच की सुविधा देनी होगी। एक दिन में तीन से पांच हजार से कम की जांच से काम नहीं चलेगा। प्रतिदिन कम से कम 20-25 हजार लोगों की जांच की व्यवस्था करनी होगी। जांच के अलावा सभी सरकारी गैर-सरकारी अस्पतालों में ज्यादा से ज्यादा आइसोलेशन बेड (Isolation Bed) बढ़ाने होंगे। अधिक संख्या में वेंटिलेटर एवं ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था भी करनी होगी।

लोगों को करना होगा जागरूक

पटना के डॉ. एए. हई (Dr. AA Hai) कहते हैं कि सबसे पहले सरकार को जागरूकता कार्यक्रम चलाना चाहिए। लोगों को इस गंभीर बीमारी के बारे में और उससे बचाव के लिए उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी देनी होगी। सेल्फ क्वारंटाइन (Self Quarantine) के लिए लोगों को प्रेरित करना होगा। समुदाय में संक्रमण की जानकारी प्राप्त करने के लिए रैंडम जांच की व्यवस्था करनी होगी।

कहते हैं स्वास्थ्य मंत्री

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री  मंगल पांडेय सामुदायिक संक्रमण की बात खारिज करते हैं। उनका मानना है कि बिहार की 12.5 करोड़ की आबादी में मात्र 3,679 पॉजिटिव हैं। मृत्युदर भी 0.6 फीसद से कम है। ऐसे में सामुदायिक संक्रमण का खतरा नहीं है। हालांकि, चुनौतियां बढ़ी हैं। निपटने के उपाय किए जा रहे हैं। आइसोलेशन बेड की संख्या 30 से 32 हजार की जा रही है। क्वारंटाइन में भी बेड बढ़ाए जा रहे हैं। कई राज्यों में बिहार से कम आबादी है, फिर भी संक्रमण ज्यादा है। जब वहां सामुदायिक संक्रमण नहीं है तो बिहार को भी डरने की जरूरत नहीं है।

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