जहानाबाद में आर्थिक बदहाली से जूझने लगे हैं निजी शैक्षणिक संस्थानों के संचालक

कोरोना वायरस से पूरी व्यवस्था बदहल हो गई है । निजी विद्यालयों के साथ-साथ अन्य शैक्षणिक संस्थान भी इसके जद में है। अनलॉक वन में भी शैक्षणिक संस्थानों को खोले जाने की अनुमति नहीं मिली है। हालांकि बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं हो इसे लेकर लॉकडाउन में ही ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था लगभग सभी संस्थानों द्वारा शुरू कर दी गई थी। इसके बावजूद भी अभिभावकों द्वारा शुल्क के भुगतान में दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है। पब्लिक स्कूल चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन के संरक्षक डॉ अभिराम सिंह बताते हैं कि निजी विद्यालयों के संचालकों के सामने विकट स्थिति उत्पन्न हो गई है। अभी तक पांच फीसद अभिभावक द्वारा भी अपने बच्चों का शुल्क जमा नहीं कराया गया है। जबकि हम लोग अप्रैल माह का सिर्फ ट्यूशन फीस ही मांग रहे हैं। अभिभावकों द्वारा जमा कराए गए शुल्क से ही विद्यालय का संचालन होता है लेकिन उन लोगों की उदासीनता के कारण शिक्षकों तथा अन्य कर्मियों के वेतन भुगतान में बड़ी समस्या उत्पन्न हो रही है। एसोसिएशन से जुड़े कृष्ण कुमार तथा राकेश कुमार ने बताया कि वर्ष 2016 के बाद से बीपीएल परिवार के बच्चों के लिए निर्धारित राशि का भुगतान भी सरकार के द्वारा नहीं की गई है। यदि इस विकट समय में इसका भुगतान हो जाता तो आर्थिक बदहाली से जूझ रहे संचालकों के लिए बड़ी राहत की बात होती। विरान पड़ा है शहर का एजुकेशन हब बना मलहचक शहर के मलहचक का इलाका कोचिग संस्थानों के बंद रहने से विरान पड़ा हुआ है। इस इलाके में कई कोचिग संस्थान संचालित हैं। इन संस्थानों के कारण स्टेशनरी तथा पाठ्य पुस्तकों की दुकानें भी इस इलाके में है। लेकिन जब संस्थान ही बंद है तो फिर छात्र-छात्राओं से पटे रहने वाले इन दुकानों में कौन आएगा। कोचिग संचालकों के सामने बेरोजगारी की स्थिति तो उत्पन्न हो ही गई है उनलोगों को संस्थान के किराए के लिए भी सोचना पड़ रहा है। निजी शैक्षणिक संस्थान शहर की अर्थव्यवस्था का रहा है मजबूत आधार जहानाबाद जैसे छोटे शहर में निजी शैक्षणिक संस्थानों की भरमार है। जिसके कारण इसे विद्यालयों का शहर भी कहा जाता है। यहां तकरीबन एक दर्जन सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूलों का संचालन होता है।इसके अलावा कई कैरियर कोचिग संस्थान भी संचालित हैं। लेकिनॉ कडाउन के कारण सभी पर ग्रहण लगा हुआ है । इन संस्थानों के कारण बड़ी संख्या में शहर में किराए का मकान लेकर छात्र-छात्राएं रहते हैं। स्थानों के बंद रहने के कारण छात्र-छात्राएं भी गांव में ही फिलहाल रह रहे हैं।

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