सड़क सुरक्षा में पुलिसकर्मियों की भूमिका बेहद अहम

सड़क सुरक्षा जागरूकता माह के अभियान को लेकर स्थानीय पुलिस लाइन में जिला सड़क सुरक्षा समिति के तत्वावधान में फर्स्ट एड,फ्र्स्ट रिस्पांडर एवं फ्री हॉस्पिटल ट्रीटमेंट पर आमलोगों और पुलिस कर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। सदर हॉस्पिटल की तरफ से डॉ बीके झा एवं डॉ अमित कुमार ने सभी ट्रैफिक पुलिस एवं पुलिस पदाधिकारियों को दुर्घटना होने की स्थिति में प्रारंभिक 90 मिनट जिसे गोल्डेन पीरियड कहा जाता है, के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षण में विशेषज्ञों ने कहा कि क्रिटिकल अवधि में सही उपचार से व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। प्रशिक्षकों ने दुर्घटना होने पर तुरंत जरूरी बरते जाने वाली सावधानियों से उपस्थित लोगों को अवगत कराया।

प्रशिक्षकों ने घायल को तुरन्त हॉस्पिटल तक ले जाने के लिए क्या व्यवस्था करना चाहिए, उसके संबंधित जानकारी दी। डॉ अमित कुमार ने इसे विस्तार से एक एक्ट के माध्यम से पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारियां दी। जिला परिवहन पदाधिकारी अजय कुमार ठाकुर ने भी प्रशिक्षण कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा के बारे में पुलिस कर्मियों को विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों की सड़क सुरक्षा में भूमिका बेहद अहम है। उन्हें इस मसले पर पूरी जानकारियां रखने से इस दिशा में काफी सहुलियत मिलेगी।

सड़कों पर सावधानी को लेकर लोगों को किया सतर्क
अधिकारियों ने विभिन्न स्थानों पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में कहा कि दुर्घटना का मुख्य कारण यह भी होता है कि यहां अधिकांश राहगीर सड़क पार करते वक्त सावधानी नहीं बरतते हैं, प्रतिफल यह होता है कि वे दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। तब उन्हें यातायात नियम की याद आती है। नियम तोड़ने का परिणाम परिवार को भुगतना पड़ता है। यातायात नियम सिर्फ चालकों के लिए ही नहीं, बल्कि पैदल चलने वालों पर भी लागू होते हैं। अधिकतर लोग इन नियमों से वाकिफ नहीं हैं। मुख्य वजह जानकारी की कमी, लापरवाही और चूक होती है।

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