जलाशयों में किया गया मां सरस्वती की प्रतिमा का विसर्जन

विसर्जन के दौरान प्रशासन ने किए थे सुरक्षा के व्यापक इंतजाम, शांति पूर्वक संपन्न हुई सरस्वती पूजा

विद्या की देवी मां सरस्वती की प्रतिष्ठापित की गई प्रतिमा को बुधवार को पूरे विधान के साथ विसर्जित कर दिया गया। विसर्जन के पूर्व बुधवार को मां शारदे की पूजा विधिवत पूजा अर्चना के बाद हवन किया गया। उसके बाद प्रशासन के द्वारा निर्धारित कए गए आसपास के तालाबों में मां की प्रतिमा को विधिवत विसर्जन किया गया। प्रतिमा विसर्जन के लिए शहर के कृषि फार्म के पास गड्ढे की साफ सफाई कर तालाब बनाया गया था। वहीं काको सूर्य मंदिर स्थित तालाब एवं बभना मंदिर स्थित तालाब की भी मूर्ति विसर्जन के लिए प्रशासनिक स्तर पर साफ सफाई कराई गई थी। जहां पूरे दिन मां शारदे की प्रतिमा का विसर्जन का दौर जारी रहा। विसर्जन के दौरान छात्रों की टोली ध्वनि विस्तारक यंत्र पर बज रहे गाने पर थिरक रहे थे। जिससे उत्सवी माहौल बन गया था। वीणा पुस्तक रंजित हस्ते भगवती भारत देवी मां नमस्ते, मां शारदे कहां तू बिना बजा रही है आदि जय कारा लगातार लग रहे थे। पूरा माहौल गुंजायमान हो रहा था। इधर जिस रास्ते से प्रतिमा गुजर रही थी वहां श्रद्धालु लोग माता के अंतिम आरती उतारने के लिए पूर्व से ही पलक पावडे बिछाए हुए थे। अंत मे ताल तालाबों के घाट पर पहुंचकर पूजा समिति के आयोजक लोग मां शारदे की की पूजा अर्चना कर सुख शांति की कामना की तथा अंतिम विदाई दिया।

मेन रोड से मूर्ति विसर्जन का मार्ग भी किया गया था निर्धारित
मूर्ति विसर्जन के दौरान प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। एक दिन पूर्व से ही डीएम नवीन कुमार, एसडीओ निखिल धनराज निपनकर व नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी मुकेश कुमार मूर्ति विसर्जन स्थल तालाबों का निरीक्षण कर बेहतर ढंग से साफ सफाई कराया था। वही मेन रोड से मूर्ति विसर्जन का मार्ग भी निर्धारित किया गया था। एनजीटी कोर्ट एवं पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के निर्देश के बाद शहर के ठाकुरबाड़ी के पास दरधा, जमुने नदी संगम घाट पर मूर्ति विसर्जन की सख्त मनाही थी। मूर्ति विसर्जन के दौरान जुलूस पर भी रोक रखी गई थी। हुड़दंग आदि आशंकाओं के मद्देनजर विसर्जन के दौरान निकली टोली पर पुलिस प्रशासन पैनी निगाह रखे हुए थी। कुल मिलाकर मूर्ति विसर्जन का काम जिले में हर जगह शांतिपूर्वक संपन्न हो गया।

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