जहानाबाद : 148 लकड़ी के टालों में 137 के पास नहीं है लाइसेंस, पेड़ों की सुरक्षा भी भगवान भरोसे

एक आेर जिला प्रशासन जल जीवन हरियाली अभियान को बढ़ावा देने व पर्यावरण संरक्षण को ले लगातार प्रयास कर कई विभिन्न प्रकार जरूरी उपायों को अपना रहा है तो दूसरी ओर जिले में अवैध लकड़ी का धंधा लगातार फल फूल रहा है। विभिन्न प्रकार के बहानेबाजियों का सहारा ले परोक्ष रूप से वन विभाग ऐसे संचालकों को विभाग ने परोक्ष रूप से मनमानी की खूली छूट दे रखी है। जिले में संचालित कुल 148 लकड़ी टालों में से 137 के पास लाइसेंस नहीं है।

यहां तक कि जिला मुख्यालय में भी दर्जनों लकड़ी टाल बिना लाइसेंस के खुलेआम वर्षों से संचालित हो रहे हैं। इस पूरे मामले में वन विभाग कर्मियों की भारी कमी का रोना रो रहा है। साथ ही विभाग अपनी नाकामियों का ठिकरा प्रशासन के कथित असहयोगात्मक रवैये पर भी फोड़ रहा है। दूसरी ओर लकड़ी के अवैध कारोबारी पेड़ों की कटाई को अपने स्तर से खूब बढ़ावा दे रहे हैं। इससे पर्यावरण का भारी नुकसान हो रहा है और इसका खामियाजा भी जिले वासियों को ही भुगतना पड़ रहा है।

थाने और प्रखंड कार्यालय में भी काटे जा रहे हैं पेड़

वन विभाग और प्रशासन की शिथिलता से गांव-गांव बिना वन विभाग के अनुमति के पेड़ाें की ताबड़तोड़ कटाई हो रही है। यहां तक की थाने और ब्लॉक परिसरों से भी पेड़ सुरक्षित नहीं हैं। काको थाने और ब्लॉक परिसर से पेड़ों की कटाई का मामला कुछ साल पूर्व तूल पकड़ा था। काको थाना परिसर से तो पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में तत्कालीन डीएसपी ने थानेदार पर लगे आरोपों की जांच भी की थी लेकिन उसके बाद जांच रिपोर्ट पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई और फिर थानेदार भी वहां से बदलकर दूसरे जिले में स्थानांतरित हो गए। इसके अलावा काको ब्लॉक परिसर से भी सीसम के कई बड़े पेड़ों की कटाई किए जाने का मामला प्रकाश में अाया था। पूर्व बीडीओ ने जांच की बात की थी लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया।

एक फोरेस्टर के हवाले है जिले का वन विभाग, कर्मियों की भारी कमी, 20 पदों में से 19 लंबे अरसे से रिक्त
जिले में वन विभाग में कुल 20 कर्मियाें का पद सृजित है, जिसमें से यहां फिलहाल एकमात्र फोरेस्टर ही कार्यरत हैं। रेंजर जैसा प्रमुख पद भी यहां रिक्त है। फिलहाल फोरेस्टर संजय कुमार ही जिले के वन विभाग को संचालित करने की औपचारिकता पूरी कर रहे हैं। विभाग का एकमात्र अधिकारी चाहकर भी लकड़ी माफियाओं का कुछ नहीं बिगाड़ पाता।

कस्बाई बाजारों में भी लकड़ी का अवैध धंधा
जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड और कस्बाई इलाके में खूलेआम लकड़ी का अवैध कारोबार पनप रहा है। घोसी, हुलासगंज, मोदनगंज, काजीसराय, मखदुमपुर, रतनी फरीदपुर, शकूराबाद सहित लगभग सभी स्थानों पर दर्जनों आरा मशीन और लकड़ी टालों का खुलेआम संचालन हो रहा है।

जिले के दो प्रतिशत भूमि पर ही वन आच्छादित ​​​​​​​

वैसे भी जिले की दो फीसदी भूमि पर वन आच्छादित नहीं हैं, जिससे पहले ही यहां का पर्यावरण काफी दूषित माना जाता है। वृक्षों के मामले में कंगाल माने जाने वाले जिले में वृक्षों की सख्त आवश्यकता को दरकिनार कर लोग अपने स्वार्थ में ताबड़तोड़ बचे हुए वृक्षों की कटाई से परहेज नहीं कर रहे। पर्यावरणविद लगातार पौधारोपन करने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन, कोई ध्यान नहीं दे रहा।

जिले में वन विभाग के पास कर्मियों की भारी कमी है। ऐसे में अवैध लकड़ी कारोबार पर शिकंजा कसने में दिक्कतें आ रही है। इसके लिए पुलिस व प्रशासन से सहयोग की अपेक्षा रहती है लेकिन वैसा सहयोग नहीं मिल पाता, जिससे धंधेबाजों पर सख्त कार्रवाई की जा सके। अवैध लकड़ी टालों की सूची डीएफओ गया को भेजी गई है। वहां से दिशा निर्देश मिलते ही अवैध धंधेबाजों के खिलाफ कार्रवाई शुरू होगी।

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