साइबर अपराध बढ़ने से आमलोगों के बैंक खाते की सुरक्षा लगातार खतरे में

साइबर अपराध के दो साल पुराने मामले की तफ्तीश में मध्य प्रदेश की पुलिस के जहानाबाद पहुंचने के बाद अब लोगों ने जहानाबाद पुलिस की सुस्त और लापरवाह कार्यशैली पर सवाल खड़ा करना शुरू कर दिया है।

साइबर अपराध के मामले में पुलिस की सुस्ती व लापरवाही से लोग यह खुलकर कह रहे हैं कि जहानाबाद की पुलिस साइबर अपराध के मामले में अगर एमपी पुलिस से सबक लेकर थोड़ा भी संजीदगी दिखाती तो यहां से जुड़े साइबर अपराध के मामले का भंडाफोड़ हो सकता था और फिर इस मामले में थोड़ा लगाम भी लग सकता था।

दरअसल, पिछले तीन सालों में घटित साइबर अपराध के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो अलग-अलग थाने में हजारों मामले फाइलों की शोभा बढ़ा रही है। पुलिस एफआईआर दर्ज कर साइबर अपराध के मामले में अपनी जिम्मेवारी पूरी समझ कर हाथ पर हाथ डाले बैठी रही है।

दो दिन पहले साइबर क्राईम के ताजा उद्भेदित मामले में भी नगर थाना का रवैया फिर चौकाने वाला रहा। सिर्फ दो पकड़े गए अपराधियों को एमपी पुलिस के साथ विदा कर पुलिस ने अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली जबकि उनके पास तैंतालिस एटीएम कार्ड पकड़े गए थे।

पुलिस पर उठे रहे सवाल
जानकारों का मानना है कि उनके खिलाफ जिले में भी केस दर्ज कर यहां के लंबित मामलों के अनुसंधान के साथ उसे जोड़ा जाना चाहिए था लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। इससे यहां की पुलिस पर सवाल उठने लगे हैं। गौरतलब हो कि मध्य प्रदेश की पुलिस साइबर अपराध के मामले में दो लड़कों को गिरफ्तार कर अपने साथ मध्यप्रदेश ले गई है।

एक भी साइबर मामले का नहीं हो सका खुलासा
जिले में पिछले तीन चार सालों में साइबर अपराधियों के सक्रिय रहने से लोगों के बैंकों के खाते सुरक्षित नहीं प्रतीत हो रहे। दरअसल जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण इलाकों की बैंक शाखाओं व एटीएम तक उनकी भारी सक्रियता है।

लगभग रोज एकाध खातों में सेंध लगाने का मामला सामने आ रहा है। कई लोग तो पुलिस के पास कार्रवाई के लिए पहुंच भी रहे हैं तो कई पुलिस के मामले में रवैये को देख भुक्तभोगी होने के बाद थानो तक पहुंचने से ही परहेज कर रहे हैं।

दरअसल इसके पीछे की वजह साफ है। पुलिस ने शायद ही सैकड़ों दर्ज मामलों में एक का भी अब तक उद्भेदन कर किसी अपराधी को सलाखों के पीछे पहुंचाया हो। यह यहां के खाताधारी लोगों के लिए भारी चिंता का विषय बना है।

साइबर अपराधियों का बड़ा गिरोह सक्रिय, जुड़े हैं आसपास के जिलों व प्रदेशों से भी तार
दो दिनों तक शहर के अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी करने और कई साक्ष्य को एकत्रित करने के बाद मध्य प्रदेश पुलिस की माने तो जिले में साइबर अपराध का एक बड़ा गिरोह सक्रिय है, जिसका नेटवर्क बिहार के अन्य जिलों के अलावा दूसरे राज्यों से भी जुड़े हैं।

लोगों का कहना है कि जिले के अलग-अलग इलाकों में हाल के दिनों में कुकुरमुत्ता की तरह साइबर कैफे खुले हैं। साइबर कैफे की गहरी जांच पड़ताल और उस पर पैनी नजर रखने की जरूरत है। यदि इन साइबर कैफे और इसके संचालकों की गहराई से जांच की जाय तो साइबर अपराध के भंडाफोड़ में कई साक्ष्य मिल सकते हैं। इसके अलावा बैंकों के सीएसपी अर्थात ग्राहक सेवा केंद्र पर भी नियमित रूप से नजर बनाए रखने और जांच पड़ताल की आवश्यकता है।

साइबर अपराध के भंडाफोड़ और इस गिरोह से जुड़े लोगों को जेल की सलाखों के पीछे भेजने के लिए जिले के लोगों को नए पुलिस कप्तान से काफी उम्मीदें हैं। एक सप्ताह पहले परस बीघा थाने की पुलिस ने साइबर अपराध के एक गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए चार अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

मध्य प्रदेश की पुलिस ने एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दो लड़कों को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई है। आगे जहानाबाद जिले के अलग-अलग इलाके में घटित साइबर अपराध के मामले की गुत्थी सुलझने के आसार दिख रहे हैं।

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