जहानाबाद जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के लिए सृजित 311 में से 228 पद रिक्त

जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल यानि सदर अस्पताल में जब 73 प्रतिशत पद खाली हैं तो ऐसे में आप वहां की स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में सहज अनुमान लगा सकते हैं। सदर अस्पताल के आधिकारिक रिकार्ड के अनुसार यहां अस्पताल अधीक्षक से लेकर स्वीपर तक के विभिन्न पदों पर कुल 311 पदों का सृजन किया गया है। फिलहाल 228 पद रिक्त हैं। जाहिर है कि ऐसे में अस्पताल का बेहतर ढंग से संचालन काफी मुश्किलों भरा है। खासकर कोरोना के आपदाकाल में इन हालातों की मार आम लोगों पर पड़ती रही है। वस्तुत: यह आंकड़ा सरकार की जन स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति संवेदनशीलता के स्तर की पोल खोल रहा है। सृजित पदों के विरूद्ध तो यहां लगभग सभी सरकारी कार्यालयों और विभागों में नियुक्तियां नहीं हैं लेकिन स्वास्थ्य जैसे प्राइम और महत्वपूर्ण सेक्टर में किसी भी कार्यालय में तीन चौथाई सीटों की रिक्ति हमारी सिस्टम की कार्य प्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

आकड़े जिले में सरकार की जन स्वास्थ्य व्यवस्था की असलियत की खोल रहे पोल, कोरोना जैसे हालात से निबटने में हो रही भारी मुश्किल

लैब टेक्नीशियन के 12 पदों में से 11 है खाली
सदर अस्पताल में प्रतिदिन लगभग डेढ़ से दो हजार मरीज इलाज काे आते हैं। आज के युग में इलाज की दिशा तय करने में विभिन्न प्रकार के पैथोलॉजिकल जांच की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। अस्पताल में जांच के लिए आने वाले लगभग पंद्रह से बीस फीसदी मरीजों को प्रतिदिन जांच प्रिस्क्राइब होता है। यहां लैब टेक्नीशियन के बारह में से ग्यारह पद खाली हैं। ऐसे में जांच कराने के लिए मरीजों को अस्पताल के एक मात्र काउंटर पर घंटों खड़ा रहकर अपनी बारी का इंतजार करना होता है। जांच के लिए यहां प्रतिदिन मथ फुटौव्वल की स्थिति कायम रहती है। जांच कराने के लिए यहां घंटों इंतजार करने वाले कई मरीजों की हालत एकदम दयनीय हो जाती है तो कई गर्मी में तो बेहोश हो जाते हैं।

एक दशक से अधिक अवधि से है बड़े पैमाने पर रिक्तियां, भरने के लिए विभाग संजीदा नहीं
ऐसा नहीं है कि सदर अस्पताल में रिक्तियों की यह समस्या कोई नई है। यहां वर्ष 2009 में जब अस्पताल का तीन सौ बेड के रूप में उत्क्रमण हुआ था, उसी वक्त अस्पताल में विभिन्न पदों का सृजन किया गया था। पदों का सृजन अस्पताल के मानक के अनुरूप किया गया था ताकि इससे यहां आने वाले मरीजों काे बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। अस्पताल प्रशासन की ओर से विभाग को रिक्तियों को लेकर कई दफे लिखित रूप से स्मारित किया जा चुका है लेकिन यहां से भेजी जाने वाले पत्रों को विभाग शायद कूड़ेदान में डाल देता है और रिक्तियों को भरने के लिए कोई ठोस पहल नहीं कर रहा।

अस्पताल में एक चर्म रोग विशेषज्ञ भी नहीं
इतने बड़े अस्पताल में एक चर्म रोग विशेषज्ञ भी नहीं है। जेनरल सर्जन के छह पदों में से चार खाली हैं जबकि स्त्री रोग विशेषज्ञ के छह पदों में से पांच खाली पड़े हैं। नेत्र रोग और हड्डी राेग विशेषज्ञ के दो दो पदों में से एक एक खाली पड़ा है। ए ग्रेड नर्स के 100 सृजित पदों के विरूद्ध 60 खाली हैं। कम्पाउंडर जैसे महत्वपूर्ण कर्मियों के आठ में से सात पद खाली हैं। जूनियर टाइपिंग सहायक, रिकार्ड क्लर्क, कम्प्यूटर ऑपरेटर के तीन तीन पदों में सभी खाली हैं। इसी प्रकार स्टाफ नर्स के सभी 11 सृजित पदों पर रिक्तियां बनी हैं।

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