जहानाबाद: कमाई के चक्कर में नाबालिग के हाथों में है ऑटो की स्टीयरिंग, ओवरलोडिंग पर भी ध्यान नहीं देते अधिकारी

कोरोना काल में ऑटो चालकों की जमकर मनमानी चलती रही। लेकिन, इनकी मनमानी पर ब्रेक लगाने के लिए अपेक्षित रूप से गहन छानबीन या अभियान नहीं चलाया जा रहा है। नगर परिषद ने इनके लिए ऑटो स्टैंड निर्धारित किया है, जहां से यात्रियों को सवार करने को कहा गया है। लेकिन, यहां तो ऑटो वालों को जब जहां यात्री दिख जाएं, वहीं ब्रेक लगा देते हैं। जो यात्री जहां उतरना चाहे, वहीं रोक देते हैं। कभी-कभी तो बीच सड़क पर भी टेंपो को खड़ा कर चालक सवारी बैठाने व उतारने लग जाते हैं। इससे हादसे की आशंका बनी रह रही है। ऑटो के डिवाइडर से टकराने, पलटने, किसी वाहन के द्वारा पीछे से धक्का मार देने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। शहर के चौक-चौराहों पर यातायात पुलिस की ड्यूटी लगी है।

थाने की पुलिस भी निगरानी में रहती है। फिर भी कम उम्र वाले चालक बन टेंपो को दौड़ा रहे हैं। कइयों के पास लाइसेंस भी नहीं है जबकि बिना लाइसेंस के वाहनों का ड्राइव करना गैरकानूनी है। लाइसेंस भी उन्हीं के नाम से निर्गत किया जा सकता है, जिन्होंने 18 साल की उम्र पूरी कर ली हो। जिला मुख्यालय में दर्जनों ऑटो काे ड्राइव वैसे बच्चे कर रहे हैं, जिनके पास लाइसेंस नहीं हैं। ऐसे में कोई हादसा हो जाए तो यह तय कर पाना मुश्किल होगा कि किसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

बाइक की तरह इनकी भी होती जांच तो लगती मनमानी पर लगाम
जिले में बाइक की जांच तेजी से की जा रही है। बिना फेस मास्क व हेलमेट या ट्रिपल लोड दोपहिया वाहन को देखते ही रोककर चलान काटा जा रहा है। इस अभियान का असर भी दिख रहा है। लेकिन, नाबालिग ऑटो चालकों की आम तौर पर छानबीन नहीं हो रही है। हालांकि, डीटीओ व पुलिस द्वारा बीच-बीच में ऑटो की जांच की जाती है। जांच के दौरान कुछ ऑटो जब्त भी किए जाते हैं। लेकिन, नाबालिग चालकों पर रोक लगाना जरूरी है। दोपहिया वाहन की तरह ई-रिक्शा की भी नियमित जांच होनी चाहिए। शहर से गांव तक की सड़कों पर ऑटो वाले क्षमता से अधिक सवारी ढो रहे हैं।

ड्राइवर सीट के पास दोनों ओर यात्री बैठाए जा रहे हैं। कुछ ऑटो वाले तो यात्रियों की जगह माल भी ढोने लगे हैं। मसलन सब्जियों के गट्ठर, इलेक्ट्रॉनिक व अन्य सामग्री लोड कर गंतव्य स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। सवारी या माल अधिक होने पर खतरे की आशंका बढ़ जाती है। लेकिन, कमाई के फेर में जान जोखिम में डाल रहे हैं। मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत कोई भी 18 वर्ष से कम उम्र का व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर वाहन नहीं चला सकता। लेकिन, यहां तो कमाई के फेर में 18 वर्ष से कम उम्र के नाबालिग भी ई-रिक्शा चला रहे हैं। ऐसे चालकों की छानबीन नहीं किए जाने से परिवहन नियमों की धज्जियां उड़ रही है।

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