क्या बिहार में भी है डेल्टा प्लस वैरिएंट के संक्रमण का खतरा, पटना एम्स के डायरेक्टर ने दिया ये जवाब

बिहार में कोरोना संक्रमण की रफ्तार भले ही कुछ कम हुई हो लेकिन नए केस लगातार सामने आ रहे हैं। गुरुवार को 212 नए पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। हालांकि, दूसरी लहर के दौरान प्रदेश में कोविड -19 के डेल्टा वैरिएंट ने जमकर तांडव मचाया। अब एक बार फिर इस महामारी के नए वैरिएंट डेल्टा प्लस का खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। पटना एम्स के डायरेक्टर डॉ. पीके सिंह ने कहा कि अभी बच्चों समेत बड़ी आबादी को वैक्सीन नहीं लगी है। ऐसे में कोरोना वायरस का नए वैरिएंट का संक्रमण प्रभावित कर सकता है।

‘डेल्टा प्लस वैरिएंट की ट्रांसमिशन दर दूसरी लहर की तुलना में बहुत अधिक’
पटना एम्स के डायरेक्टर डॉ. पीके सिंह ने कहा कि कोरोना वायरस के नए वैरिएंट जिसे B.1.617.2.1 या AY.1 के रूप में जाना जाता है। इसका प्रभाव पहले ही महाराष्ट्र और कुछ अन्य राज्यों नजर आने लगा है, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता इसका असर बिहार में नजर नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि दूसरी जगहों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, डेल्टा प्लस वैरिएंट की ट्रांसमिशन दर दूसरी लहर की तुलना में बहुत अधिक है और यह अधिक घातक भी साबित हो सकती है।

डेल्टा प्लस वैरिएंट में कोरोना वैक्सीन है कितनी प्रभावी?
डॉ. पीके सिंह ने आगे कहा कि इससे बचाव के लिए जरूरी है कि लोग कोरोना गाइडलाइंस का पालन करें। मास्क, सोशल डिस्टेंस के साथ-साथ जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें। लॉकडाउन में छूट के बावजूद अगर लोग सावधानी बरतते हैं तो इस महामारी के मामलों में और लगाम लगाई जा सकती है। वहीं डेल्टा प्लस वैरिएंट में कोवैक्सिन और कोविशील्ड की वैक्सीन कुछ प्रभावी है, अभी इस पर कोई वैज्ञानिक अध्ययन सामने नहीं आया है। हालांकि, डॉ सिंह ने कहा कि टीकाकरण के बाद विकसित एंटीबॉडी काफी हद तक सुरक्षा प्रदान करेंगे।

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