जहानाबाद: कोरोना संक्रमण का खतरा कम होते ही लापरवाह हुए लोग

कोरोना संक्रमण का प्रभाव काफी हद तक कम हो गया। अब जिले में मात्र कोरोना के तीन एक्टिव मरीज रह गए हैं। अब लोग सतर्कता नहीं बरत रहे हैं। संक्रमण की दूसरी लहर जब आपने पूरे सबाब पर था तो हर और सतर्कता देखी जा रही थी लेकिन जैसे ही संक्रमण की चेन कमजोर हुई फिर से लापरवाही देखने को मिल रही है। लोग अब मास्क को लेकर भी लापरवाह होते जा रहे हैं।

कई लोगों के मास्क भी नाक के नीचे लटके रहते हैं। दुकान तथा बाजार में पहले की तरह ही सामान की खरीद को लेकर आपा-धापी है। शारीरिक दूरी का कोई मतलब यहां नहीं दिखता है। दैनिक जागरण की टीम ने मंगलवार को जब बाजार की स्थिति का अवलोकन किया तो कहीं भी कोरोना गाइडलाइन के प्रति लोग सजग नहीं दिख रहे थे। समय सुबह 8:00 बजे सुवह की बेला,आसमान में छाए बादल को देख बारिश की संभावना भी बनी हुई थी। जिसके कारण लोग आवश्यक सामग्रियों की खरीदारी सुनिश्चित करना हीं बेहतर समक्ष रहे थे। हालांकि अभी कई दुकानों का शटर खुलना ही बाकी था, लेकिन बाजार में खरीदारों की कोई कमी नजर नहीं आ रही थी। चौक चौराहे पर तो लोगों की भीड़ थी। बजार में भी लोगों की संख्या कम नहीं थी। हालात को देख इस बात का सहज अनुमान लगाया जा सकता था कि अब लोगों में कोरोना संक्रमण का भय समाप्त हो गया है।

समय सुबह 8:30 बजे लोग बाजार की ओर मदमस्त चल रहे थे। जगह जगह इक्के दुक्के पुलिसकर्मी भी तैनात थे लेकिन वे सिर्फ अपनी मौजूदगी तक ही सीमित थे। शहर के निचली रोड निवासी सुनीता देवी को सब्जी की खरीदारी करनी थी। वे बाजार में एक दुकान से दूसरी दुकान में मोलभाव करने में जुटी थीं। मोल भाव का अंदाज यह साबित कर रहा था कि सही कीमत का आंकलन करना इन्हें भलीभांति आता है। जिस तरह से वे पैसे को बचाने को लेकर सजग थीं। वह सजगता कोरोना संक्रमण के प्रति नहीं था। दुकानदारों द्वारा भी दूरी के अनुपालन को लेकर कहीं किसी प्रकार की कोई सजगता नहीं थी। न गोला का निर्माण किया गया था और न ही दूर रहने की नसीहत दी जा रही थी।

समय सुबह 9:00 बजे संक्रमण काल में सामान लेने देने से पहले दुकानदारों द्वारा ग्राहकों तथा खुद के हाथों को सैनिटाइज कराना जरूरी है। यहां तो कहीं भी इसका अनुपालन नहीं हो रहा है। जब एक दुकानदार से पूछा गया कि क्या आपके पास सैनिटाइजर है तब वे एक पुरानी सीसी बाहर निकालते हैं। जिसे देख यह सहज अनुमान लगाया जा सकता था कि लंबे समय से इसका उपयोग नहीं किया गया है। बल्कि यह दुकान के किसी कोने में यूं ही पड़ी है। यह हाल कई दुकानों में देखने को मिली। दुकानदारों का भी साफ- साफ कहना था कि अब संक्रमण का प्रभाव कम हो गया है। इसलिए इसकी ज्यादा जरूरत नहीं रह गई है।

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