बिहार की जेलों में भीड़ कम करने के लिए कैदियों को किया जाएगा रिहा, सरकार ने तय किए मानक

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार राज्य की जेलों से भीड़-भाड़ कम कर कैदियों को रिहा करने की कार्यसूची तैयार कर ली गई है। शीर्ष अदालत ने सात मई को राज्यों को उच्चस्तरीय समिति गठित कर कैदियों को जमानत पर रिहा करने एवं उन्हेंं कोरोना संक्रमण से बचाने की पहल करने का निर्देश दिया था।

अधिवक्ता समीर कुमार ने हाल में ही दैनिक जागरण में छपी एक खबर का हवाला देते हुए पटना हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि प्रदेश की जेलों में 40 हजार कैदियों को रखने की क्षमता है, लेकिन हैैं 50 हजार से भी ज्यादा। इससे कैदियों के संक्रमित होने का खतरा है। इस पर हाई कोर्ट ने मामले को राज्य सरकार के समक्ष रखने के लिए कहा था। आदेश पर अमल करते हुए कैदियों को पेरोल पर रिहा करने की व्यवस्था की गई।

रिहा करने के प्रविधान : कैदियों को अंतरिम जमानत, जमानत, पेरोल व सजा माफी देकर रिहा किया जा सकता है।
नमें ऐसे कैदी आ सकते हैं :

– जो सात साल या उससे कम सजा के मामले में बंद हैं।

-जो सीआरपीसी की धारा 436 के तहत बंद किए गए हैैं।

-जो धारा 107, 108 एवं 151 के तहत जेल में बंद हैं।

-जो 10 साल की सजा प्राप्त हैं, लेकिन गंभीर रूप से बीमार हैैं।

-जो न्यायालय की अवमानना के जुर्म में जेल में बंद हैं।

इन्हें रिहा नहीं करना है :

– जो एनडीपीएस, टाडा, पोटा, यूएपीए, एंटी हैजेकिंग, पोस्को कानून के दोषी/अभियोगाधीन हैं।

– जो आतंकी गतिविधियों, मनी लांड्रिंग, आम्र्स एक्ट, बिहार क्राइम कंट्रोल एक्ट, एसिड अटैक जैसे संगीन गुनाह में दोषी/ अभियोगाधीन हैं।

– जो आॢथक अपराध में दोषी/ अभियोगाधीन हैं।

– जो अभ्यस्त अपराधी हैं। अप्रवासी कैदी को भी रिहा नहीं करना है।

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