पटना हाईकोर्ट कहा-बिहार सरकार में चल रहा बिना दिमाग का सिस्टम, लापरवाही पर शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव पर जुर्माना लगाया

अपने रिटायरमेंट के बाद सही वेतनमान और बकाए रकम के लिए गुहार लगाते समस्तीपुर महिला कॉलेज में सेक्शन ऑफिसर रहे राम नवमी शर्मा की याचिका हाई कोर्ट में मंजूर कर ली गई है। न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह की एकलपीठ ने राम नवमी शर्मा की रिट याचिका को मंजूर करते हुए कहा कि “इस कोर्ट की नजरों में भारत के संविधान में परिभाषित कोई भी संस्था इतनी बे-दिमाग (माइंडलेस) होकर काम नहीं कर सकती, जितना बिहार सरकार कर रही है। इसके अलावा अपनी करतूत को छुपाने के लिए इतनी लापरवाही भी कोई संस्था नहीं दिखा सकती जितना बिहार सरकार ने इस मामले में दिखाया है।

मामला समस्तीपुर महिला कॉलेज के रिटायर्ड रोकड़पाल के वेतनमान निर्धारित करने का था। याचिकाकर्ता के बढ़े वेतनमान की मांग पर शिक्षा विभाग ने याचिकाकर्ता का पे-स्केल, सेक्शन अफसर तो दूर, सहायक के वेतनमान से भी कम तय किया। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को बकाए राशि का भुगतान तीन महीने के अंदर करे। साथ ही हाई कोर्ट ने शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव पर 20 हजार का जुर्माना भी लगाया।

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